महिला उद्यमिता, आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक सशक्तिकरण: छत्तीसगढ़ का विश्लेषण
Keywords:
महिला उद्यमिता, सूक्ष्म उद्यम, सामाजिक सशक्तिकरण, छत्तीसगढ़, स्वयं सहायता समूह, ग्रामीण विकास, लैंगिक समानताAbstract
प्रस्तुत अनुभवजन्य अध्ययन छत्तीसगढ़ राज्य के सात जिलों में महिला-नेतृत्व वाले सूक्ष्म उद्यमों तथा उनके सामाजिक सशक्तिकरण पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषणात्मक परीक्षण करता है। इस शोध में 250 महिला उद्यमियों से संरचित साक्षात्कार अनुसूची एवं सामाजिक सशक्तिकरण मापनी (Likert-5) के माध्यम से प्राथमिक आँकड़े एकत्रित किए गए। अध्ययन में t-परीक्षण, χ² परीक्षण, एकमार्गीय ANOVA तथा बहु-प्रतिगमन विश्लेषण का उपयोग किया गया। परिणाम स्पष्ट करते हैं कि उद्यम-स्थापना के पश्चात महिलाओं के समग्र सशक्तिकरण स्कोर में सांख्यिकीय दृष्टि से अत्यंत सार्थक वृद्धि (t=11.62, p<0.01) हुई है। आर्थिक स्वतंत्रता (Δ=+1.73), निर्णय-क्षमता (Δ=+1.43) तथा सामाजिक भागीदारी (Δ=+1.53) में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। बहु-प्रतिगमन विश्लेषण (R²=0.68) दर्शाता है कि मासिक आय (β=0.412), शिक्षा (β=0.287) तथा स्वयं-सहायता समूह सदस्यता (β=0.164) सशक्तिकरण के प्रमुख पूर्वानुमानक हैं। यह शोध नीति-निर्माताओं को यह सुझाव देता है कि महिला उद्यमिता को सुदृढ़ करने वाली योजनाओं का विस्तार ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों तक किया जाए ताकि सामाजिक सशक्तिकरण की खाई को पाटा जा सके।


